भागलपुर, जनवरी 31 -- -प्रस्तुति- सुभाष पांडेय अपर किऊल जलाशय योजना उत्तर बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे सिकंदरा और आसपास के कृषि क्षेत्र के लिए जीवनरेखा मानी जाती रही है। इस महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजना की शुरुआत वर्ष 1974 में हुई थी। उस समय सिकंदरा के विधायक रामेश्वर पासवान थे, जिनका इस योजना से गहरा लगाव रहा। उनका मानना था कि यदि इस योजना को सही ढंग से धरातल पर उतारा गया, तो क्षेत्र के हजारों किसानों को सिंचाई की स्थायी सुविधा मिलेगी और खेती पर निर्भर आबादी आर्थिक रूप से सशक्त हो सकेगी। हालांकि, योजना की शुरुआत उत्साह के साथ हुई, लेकिन समय के साथ यह कई तकनीकी, प्रशासनिक और वित्तीय अड़चनों में उलझती चली गई। अलग-अलग चरणों में कार्य बाधित होता रहा, जिससे किसानों की उम्मीदें बार-बार टूटती रहीं। कई वर्षों तक परियोजना अधूरी पड़ी रही और इसका लाभ क...