गोरखपुर, मई 2 -- गोरखपुर। बुनकरों के चलते गोरखपुर से लेकर संतकबीर नगर तक टेक्सटाइल उद्योग कभी देश में पहचान रखता था, लेकिन मगहर के कताई मिल से लेकर सहजनवा का जूट मिल तक एक-एक कर सब बंद हो गए। वक्त की मार के चलते सैकड़ों पावरलूम तो बंद हुए ही, डाइंग फैक्ट्रियों में भी ताला लग गया। रेडीमेड गारमेंट को एक जिला, एक उत्पाद में स्थान मिला लेकिन बाजार नहीं मिलने से छोटी-छोटी यूनिटें दम तोड़ चुकी हैं। बांग्लादेश में भी रेडीमेड गारमेंट की तबाही का लाभ स्थानीय कारोबारी नहीं उठा सके। एक जिला एक उत्पाद में सरकार की योजनाओं का लाभ ऐसे लोगों को मिल गया, जिनके लिए ऋण कारोबार बढ़ाने के बजाए अन्य काम के लिए जरूरी था। कुल मिलाकर भीलवाड़ा की टक्कर लेने की क्षमता वाले गोरखपुर में टेक्सटाइल इंडस्ट्री बर्बादी के मुहाने पर खड़ी है। टेक्सटाइल उद्योग से जुड़े लोगो...
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