गोंडा, जनवरी 5 -- दूसरों को दुख-दर्द से छुटकारा दिलाने वाले संविदा उपचारक (स्टाफ नर्स) व्यवस्था के दर्द से कराह रहे हैं। नियमित स्टाफ तो अब बहुत कम बचे हैं, सारे काम की जिम्मेदारी संविदा नर्सों के कंधों पर आ गई है। संविदा पर कार्य करने वाले नर्सों को अब नौकरी करने में दुश्वारियों से जूझने के साथ ही मामूली वेतन पर गुजारा करना पड़ रहा है। काम तो वह भरपूर कर रहे हैं लेकिन सरकारी सुविधाओं से कोसों दूर हैं। गोण्डा। साढ़े चार साल की कड़ी मेहनत करके बीएससी नर्सिंग की डिग्री हासिल कर मन में सेवा भावना का जूनून लिए हुए छात्र-छात्राएं संविदा स्टाफ नर्स की नौकरी करने आए हैं। एनआरएचएम के तहत इनकी तैनाती मेडिकल कॉलेज, जिला महिला अस्पताल और सीएचसी व पीएचसी पर की गई। ज्यादातर संविदा स्टाफ नर्स बाहर के जनपदों के हैं। घर से कई सौ किमी. दूर मामूली और बेहद ...
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