गाजीपुर, मार्च 8 -- मनरेगा विश्व में रोजगार देने वाली सबसे बड़ी योजना है जिससे करोड़ परिवार जोड़े जा चुके हैं। उस योजना की मुख्य कड़ी कहे जाने वाले रोजगार सेवक बदहाल हैं। परिवार समेत गुजार कर पाने लायक मानदेय नहीं है। वह भी समय से नहीं मिलता। उससे ईपीएफ की कटौती का हिसाब इन सेवकों को नहीं मिल रहा है। रोजगार सेविकाएं मातृत्व अवकाश लेने पर काम से अनुपस्थित मान ली जाती हैं। 14 वर्षों से वे स्थायीकरण की मांग कर रहे हैं। चाहते हैं, स्थानीय अफसर ईपीएफ कटौती का तो हिसाब दें। गाजीपुर में 2008 में मनरेगा योजना की शुरुआत हुई। इसको धरातल तक पहुंचाने के लिए रोजगार सेवकों की नियुक्ति की गयी थी। बाद में पंचायत स्तर पर सभी योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी भी इनको दे दी गई। सदर ब्लाक पर जुटे रोजगार सेवकों ने 'हिन्दुस्तान से अपनी समस्याएं साझा कीं। उत...
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