वाराणसी, सितम्बर 18 -- वाराणसी। गृहस्थी की गाड़ी आर्थिक संकट के दलदल में न फंसे, इसलिए उन्होंने स्वावलंबन की राह चुनी। जुनून-जज्बा, मेहनत और लगन ने उनमें हुनर विकसित किया। धूप-अगरबत्तियों के साथ कढ़ाईदार वस्त्रों के उत्पादों ने जिंदगी में उम्मीदों के रंग भरे मगर कुछ चुनौतियां उस रंग को चटख नहीं होने दे रहीं। उत्पाद के लिए सही बाजार और कच्चा माल के लिए शीतगृह (कोल्ड स्टोरेज) स्वावलंबी महिलाओं की सबसे बड़ी जरूरत है। वाराणसी में 11,000 से अधिक स्वयं सहायता महिला समूह हैं। इनसे 1.38 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। इन समूहों के माध्यम से महिलाएं आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और शैक्षिक रूप से सशक्त बन रही हैं। वे जीवन को बेहतर बनाने के लिए वित्तीय समावेशन और आजीविका गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेती हैं। इन महिलाओं के बीच से ही 'लखपति दीदी, ड्र...
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