वाराणसी, नवम्बर 5 -- वाराणसी। पहले महापालिका, फिर नगर निगम का हिस्सा रहे मोहल्लों में ककरमत्ता भी शामिल है। समय के साथ आबादी बढ़ी, मकानों-कॉलोनियों का विस्तार होता गया तो ककरमत्ता दक्षिणी के नाम से नया मोहल्ला बन गया। पिछले परिसीमन के बाद नगर निगम का हिस्सा बने इस मोहल्ले को बुनियादी सुविधाओं का शिद्दत से इंतजार है। गड्ढेदार सड़क, हर मोड़ पर कचरे का ढेर, बीमारियों का साया, बांस-बल्लियों के सहारे बिजली आपूर्ति और अराजकतत्वों की बेरोकटोक आवाजाही से सभी परेशान हैं। इस विषैले माहौल में बाशिंदों की सांस घुट रही है। पुरनियों के मुताबिक ककरमत्ता 1956 में बसना शुरू हो गया था। इसके दक्षिणी मोहल्ले में इन दिनों सात सौ के आसपास मकान हैं जिनमें लगभग 14 हजार की आबादी रहती है। 'हिन्दुस्तान' से बातचीत शुरू हुई तो नागरिकों ने समस्याओं की लंबी सूची रख दी।...
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