वाराणसी, जनवरी 31 -- वाराणसी। दुश्वारियों से तंग जीवन जब 'हांफने' लगता है तो परिस्थितियां 'मौन' रूप से 'सांसों' पर आक्रमण कर देती हैं। वे ऐसी पीड़ा के रूप में आकार लेने लगती हैं, जिनकी 'ठोकर' से 'सुकून' गुम हो जाता है। इन्हीं हालात में नारकीय जिंदगी भोग रहे हैं डिहवा बस्ती (मंडुवाडीह) के लोग। नाला जाम है, घरों के आगे जलजमाव के चलते निकलना मुश्किल। दुर्गंध कहीं कदम नहीं ठहरने देती। गलियां क्षतिग्रस्त। बिजली के तार खिड़कियों के सहारे हैं। शिकायत दर शिकायतें अनसुनी हैं। यहां के निवासी बेहद लाचारी महसूस कर रहे हैं। --------- डिहवा के लोग काफी समय से सांसत में जी रहे हैं। समस्याओं के समाधान की आस भी अब टूटने लगी है। 'हिन्दुस्तान' से बातचीत में यहां के लोगों ने अपनी व्यथा सुनाई और दुश्वारियां दिखाईं। नीता, जितेंद्र पटेल, रिषि ज्योति ने कहा कि क...
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