वाराणसी, सितम्बर 28 -- वाराणसी। उम्मीदें जब जख्मी होती हैं, तब समझ नहीं आता कि अब समाधान का कौन रास्ता तलाशा जाए? बात दुरुस्त सड़क-गलियों के सुधार की हो या हस्तशिल्प की महत्ता को आगे बढ़ाने की, दोनों का एक दूसरे से 'मूक रिश्ता है। सुगम आवागमन की सुविधाएं मिलें तो कारोबार का मार्ग प्रशस्त होगा ही। इन्हीं उम्मीदों के साथ सिहाबीर-गोलाघाट (रामनगर) के लोग जीवनयापन कर रहे हैं। यहां हथकरघा से जुड़ी समिति से 300 से अधिक लोग 'हैंडलूम पर हुनर दिखाते हैं, लेकिन खराब और संकरे रास्तों के कारण उनके मनोभाच चोटिल होते हैं। हैंडलूम पर रोज अपने 'हुनर को अमलीजामा पहनाने के बाद जब लोग घर लौटते हैं तो गलियों में बहता पानी, ऊबड़-खाबड़ चौके अचानक टीस देते हैं। कई बार खराब गलियों के कारण मुख्य सड़क से ही 'हस्तशिल्प प्रेमी लौट जाते हैं। समिति परिसर में जुटे लोगों...
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