नई दिल्ली, अक्टूबर 16 -- वाराणसी। बर्तन रोज की जरूरत हैं, लिहाजा इनकी खरीद बिक्री होती रहती है। धनतेरस और दीपावली पर उनकी मांग बढ़ जाती है लेकिन इस बार काशीपुरा स्थित बर्तनों के थोक बाजार में मंदी का 'शोर' है। दुकानदार मायूस हैं। कहते हैं कि कभी तांबे और पीतल के कमंडल, सूप और दूसरे बर्तनों की खनक रहती थी, अबकी वैसा दिख नहीं रहा। फैंसी बर्तनों की बढ़ती मांग, ऑनलाइन खरीदारी का झटका और कच्चे माल पर भारी जीएसटी ने इस कारोबार की नींव हिला दी है, बिचौलियों से भी 'चपत' लग रही है। काशीपुरा पूरे पूर्वांचल में बर्तन के बड़े थोक बाजारों में शुमार है। यहां दूर-दराज के जिलों के व्यापारी बर्तन की खरीदारी करने आते हैं। यहां की सबसे बड़ी विशेषता यहां के पारंपरिक हस्तनिर्मित बर्तन हैं। इनकी धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में हमेशा मांग रहती है। बाजार की खास...
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