वाराणसी, जुलाई 17 -- वाराणसी। बदलते दौर में लोगों की हंसी-खुशी गुम हो गई है। इस वेदना से स्वयं को मुक्त कराने के लिए कुछ लोगों ने 'ठहाका संघ की नींव रख दी है। भोजपुरी अध्ययन केंद्र (बीएचयू) परिसर में सुबह-सुबह संघ के सदस्यों की जुटान होती है। वे लोग कुछ देर ठठा ठठाकर हंसते हैं, व्यायाम करते हैं और निर्मल मन से घर जाते हैं। इन 'ठठाकुओं को इस बात का अफसोस है कि ज्यादातर लोग घरों से नहीं निकलते, आलस्य में पड़े रहते हैं। न खुद हंसते हैं, न दूसरों को 'हंसी दे पाते हैं। शरीर के लिए जितना जरूरी व्यायाम है, उतना ही जरूरी है मन के स्वास्थ्य के लिए हंसना, ठहाके लगाना, लेकिन आज के वातावरण में जीवन शैली सुबह से शाम तक तनाव झेल रही है। इससे निजात और ठहाके लगाकर मन निर्मल रखने के लिए भोजपुरी केंद्र परिसर में जुटे लोगों ने 'हिन्दुस्तान से बातचीत में अपन...
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