भागलपुर, अगस्त 12 -- प्रस्तुति: ओमप्रकाश अम्बुज, मोना कश्यप सुबह की ठंडी हवा, ओस से भीगी घास और उगते सूरज की लालिमा- यही वह क्षण है जब योग साधक अपने भीतर शांति खोजते हैं। लेकिन कटिहार में यह सुकून अधूरा रह जाता है। कभी सार्वजनिक स्थलों का शोर तो कभी कॉलेज का बंद गेट साधकों की राह रोक देता है। महिलाएं असहज माहौल के कारण पीछे हट जाती हैं और अभ्यास की लय टूट जाती है। सुविधाओं के अभाव में तन-मन को जोड़ने वाला योग यहां संघर्ष कर रहा है। फिर भी साधकों की उम्मीद बरकरार है कि एक दिन कटिहार में योग की सांसें पूरी गहराई से चलेंगी। योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है। हमारे देश की सदियों पुरानी धरोहर, जो तन और मन दोनों को स्वस्थ रखती है। कोरोना महामारी के बाद यह और स्पष्ट हो गया कि प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और मानसिक शांति पाने के लिए योग से ब...
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