भागलपुर, अगस्त 17 -- प्रस्तुति: ओमप्रकाश अम्बुज, आशीष कुमार सिंह कटिहार जिले के फलका प्रखंड का भंगहा गांव कभी नाव निर्माण की कला के लिए प्रसिद्ध था। यहां के कारीगरों की बनाई नावें बेगूसराय, सहरसा, सुपौल, दरभंगा से लेकर झारखंड तक जाती थीं। यह धंधा सिर्फ रोजगार ही नहीं, बल्कि गांव की पहचान और विरासत भी था। पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले आ रहे इस हुनर ने सैकड़ों परिवारों को संबल दिया। लेकिन बदलते वक्त के साथ हालात बिगड़ गए। नाव बनाने का काम अब साल भर नहीं, सिर्फ बाढ़ के दिनों तक सिमटकर रह गया है। नए साधनों और परिवहन के बढ़ते विकल्पों ने इस परंपरा को हाशिये पर ला दिया है। नाव कारीगरों के सामने आज जीविका का संकट गहराता जा रहा है। सीमांचल का कटिहार जिला अपनी विविध परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर के लिए जाना जाता है। इसी जिले के फलका प्रखंड अंतर्गत भंगहा गांव ...
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