भागलपुर, फरवरी 22 -- -प्रस्तुति: ओमप्रकाश अम्बुज, मोना कश्यप सीमांचल के इस हिस्से में सुबह की शुरुआत अक्सर मवेशियों की घंटियों की आवाज से होती है। खेतों के साथ-साथ गोठ भी यहां की अर्थव्यवस्था का अहम केंद्र है। वर्षों से पशुपालन ग्रामीण परिवारों के लिए स्थायी आय का भरोसेमंद साधन रहा है। फसल की कीमत बाजार और मौसम पर निर्भर हो सकती है, लेकिन दूध की बिक्री से मिलने वाली आमदनी रोजमर्रा की जरूरतों को संतुलित करती है। इसके बावजूद यह दुधारू अर्थव्यवस्था कई बार एक झटके में डगमगा जाती है। बीमारी या दुर्घटना से पशु की मृत्यु होने पर परिवार की आर्थिक रीढ़ टूट जाती है। एक गाय या भैंस केवल पशु नहीं, बल्कि निवेश, बचत और भविष्य की सुरक्षा का प्रतीक होती है। उसकी हानि सीधे घर की आमदनी, बच्चों की पढ़ाई और घरेलू खर्चों पर असर डालती है। सरकार की ओर से पशु बी...
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