भागलपुर, अगस्त 3 -- प्रस्तुति: ओमप्रकाश अम्बुज, आशीष कुमार सिंह कटिहार की धरती पर कोसी की धारा अब जीवन नहीं, विनाश का प्रतीक बन चुकी है। कभी सहारा देने वाली यह नदी अब दिशाहीन होकर फलका जैसे इलाकों को तबाह कर रही है। किशनटोली के पास गाद जमने से धारा ने रुख बदल लिया है, जिससे कहीं सूखा है, तो कहीं अनावश्यक बाढ़। खेत उजड़ गए हैं, घाट लुप्त हो चुके हैं और किसानों की उम्मीदें हर साल पानी में बह रही हैं। यह सिर्फ बाढ़ नहीं, बल्कि एक पूरी पीढ़ी की पीड़ा, संघर्ष और टूटते विश्वास की कहानी है। हर साल कोसी की नई चाल और प्रशासन की पुरानी चुप्पी मिलकर इस त्रासदी को और गहरा बना रही है। समाधान के बजाय सिर्फ निरीक्षण और आश्वासन मिलते हैं। फलका प्रखंड में कोसी नदी अब राहत नहीं, हर साल आफत बनकर आती है। बाढ़ अब सिर्फ मौसम का कहर नहीं, बल्कि नदी की धारा बदलन...
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