भागलपुर, जुलाई 11 -- प्रस्तुति: ओमप्रकाश अम्बुज, मणिकांत रमण हर आंख में एक सपना होता है-आसमान छूने का, कुछ बनने का। कटिहार की बेटियों की भी आंखों में ऐसे ही सपने पलते हैं, लेकिन जब सपनों को पंख देने वाला मंच ही न मिले, तो वे अधूरे रह जाते हैं। जिले में केवल एक महिला कॉलेज है, बाकी बेटियों को या तो सहशिक्षा वाले कॉलेज में असहज माहौल झेलना पड़ता है या फिर पढ़ाई ही छोड़ देनी पड़ती है। हजारों प्रतिभाएं हर साल इंटर पास कर चुपचाप घर बैठ जाती हैं, सिर्फ इसलिए कि उनके लिए उच्च शिक्षा की राह अब भी बंद है। क्या यही है शिक्षा का समान अधिकार? यह बातें हिन्दुस्तान के साथ संवाद के दौरान उभर कर सामने आईं। पापा ने इंटर के बाद बाहर भेजने से मना कर दिया, बोलीं - अगर यहां महिला कॉलेज होता तो जरूर पढ़ती. ये शब्द हैं मनीषा कुमारी के, जो कटिहार के एक गांव की र...
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