भागलपुर, जनवरी 3 -- - प्रस्तुति: ओमप्रकाश अम्बुज आजादी से पहले से लेकर आज तक संचार का सबसे भरोसेमंद माध्यम रहे डाक विभाग ने देश के हर कोने को जोड़ा। शहर से गांव और गांव से राजधानी तक चिट्ठियों, मनीऑर्डर और बचत योजनाओं के जरिए डाकघर आम आदमी की जरूरतों का केंद्र रहा। कटिहार शहर भी इससे अछूता नहीं रहा, लेकिन समय बदला, संचार के साधन बदले और उपभोक्ताओं की अपेक्षाएं भी बदलीं। अफसोस यह है कि बदलते दौर के साथ डाक विभाग खुद को पूरी तरह ढाल नहीं सका। नतीजा यह हुआ कि शहरी इलाकों में लोग धीरे-धीरे डाकघरों से दूरी बनाने लगे हैं और कूरियर कंपनियों की ओर रुख कर रहे हैं। शहर के मध्यम वर्ग के लिए डाकघर कभी छोटी बचत योजनाओं और भरोसेमंद सेवाओं का प्रतीक था। लेकिन आज हालात यह हैं कि पत्र व्यवहार हो या हल्के सामानों की डिलीवरी, लोग निजी कूरियर सेवाओं को ज्याद...
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