भागलपुर, जून 4 -- मोची समाज की परेशानी प्रस्तुति: ओमप्रकाश अम्बुज, मोना कश्यप हर सुबह जब शहर की रफ्तार तेज होती है, कटिहार के किसी कोने में एक मोची अपने झोले से औजार निकालता है-कभी पेड़ की छांव में, कभी रेलवे स्टेशन के किनारे। उसके हाथ पुराने जूते को नया जीवन देते हैं, पर उसका अपना जीवन समय और गरीबी के थपेड़ों से थका हुआ है। पीढ़ियों से चला आ रहा यह हुनर अब बोझ बनता जा रहा है। नई पीढ़ी इस विरासत से दूर भाग रही है। दिल कहता है-अगर इन्हें अवसर मिले, स्थायी दुकान हो, आधुनिक प्रशिक्षण मिले, तो शायद ये हाथ सिर्फ जूते नहीं, अपना भविष्य भी संवार सकें। कटिहार के मोची समाज की कहानी सिर्फ एक पेशे की नहीं, बल्कि पीढ़ियों की तपस्या, संघर्ष और अब टूटती उम्मीदों की भी है। कुरसेला, समेली, फलका, कोढ़ा, बरारी, कदवा और मनसाही प्रखंडों में फैली इस बिरादरी क...
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