भागलपुर, जुलाई 6 -- प्रस्तुति: ओमप्रकाश अम्बुज, मोना कश्यप कटिहार के युवा सुबह की पहली किरण के साथ सपनों की दुनिया में कदम रखते हैं। कोई कंप्यूटर स्क्रीन पर कोड लिखता है, तो कोई कीबोर्ड पर टाइपिंग के हुनर को निखारता है। टेली से लेकर वेब डिजाइन तक, हर कोर्स में वे अपना भविष्य तलाशते हैं। लेकिन जब कोर्स खत्म होता है, तो सवाल खड़ा होता है - अब आगे क्या? हुनर है, सर्टिफिकेट है, जज्बा है... पर मौके नहीं। बेरोजगारी की दीवार उनके आत्मविश्वास को तोड़ती है। सपनों की आंखें सूनी होने लगती हैं। ये कहानी सिर्फ डिग्री की नहीं, सम्मानजनक जिंदगी की तलाश की भी है। कटिहार के हजारों युवा हर सुबह कंप्यूटर संस्थानों की ओर जाते हैं-आंखों में आत्मनिर्भर बनने का सपना और दिल में बेहतर भविष्य की उम्मीद लिए। कोई टेली सीख रहा है, कोई पायथन कोड कर रहा है, कोई टाइपिंग...
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