भागलपुर, जून 12 -- प्रस्तुति: ओमप्रकाश अम्बुज, मोना कश्यप कटिहार की वो कॉलोनियां, जिनमें कभी रौशनी थी, बच्चों की किलकारियां थीं और भविष्य के सुंदर सपने पलते थे, आज थकी-हारी सांसें ले रही हैं। पी एंड टी, प्रोफेसर और ऑफिसर कॉलोनी की गलियों में अब न उम्मीद की चहक है, न व्यवस्था का साया। टूटी सड़कों पर गंदगी और सीवर बहता है, बिजली के तार मौत बन लटके हैं, और लोग खामोशी ओढ़े हुए हैं। जिन आंखों में एक वक्त बदलाव की चमक थी, अब उनमें मायूसी की परतें हैं। थक-हार चुके लोग अब सिर्फ संकटमोचन की ओर निहारते हैं - शायद वहीं से कोई जवाब मिले, कोई राह निकले। कटिहार शहर की कुछ चुनिंदा कॉलोनियां, जिन्हें कभी शहर की प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता था, आज बदहाली की जीती-जागती तस्वीर बन गई हैं। पी एंड टी कॉलोनी, प्रोफेसर कॉलोनी और ऑफिसर कॉलोनी - ये नाम सुनते ही व...
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