एटा, सितम्बर 26 -- होली हो दिवाली या फिर करवाचौथ। हर दिन काम करने का लक्ष्य निर्धारित होता है। घर परिवार को छोड़ मरीज की सेवा करना ही इनका धर्म है। परिवार को छोड़कर आना पड़ता है। दिन की ड्यूटी हो तो बच्चों को तैयार करने के साथ स्कूल भेजने और शाम को घर पहुंच कर परिवार की जिम्मेदारियां उठाती हैं। मरीज की सेवा के आगे सब कुछ भूल जाती हैं। अपने शरीर की पीड़ा भी मरीज के दर्द के आगे याद नहीं रहती। दिन रात उनकी सेवा में जुटी रहती हैं। बोले एटा के तहत मेडिकल कॉलेज में काम करने वाली मातृ शक्ति यानी नर्सों ने अपनी बात रखी। जिस नर्स को समाज में 'दूसरी मां और 'सच्ची सेविका कहा जाता है। किसी भी अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र या क्लीनिक में नर्स की भूमिका डॉक्टर से कम महत्वपूर्ण नहीं होती है। रोगी के इलाज में जहां डॉक्टर दवाइयां लिखते हैं, वहीं नर्स उस दवा को सह...
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