एटा, जनवरी 16 -- देश को आजाद हुए सात दशक का समय बीत चुका है। इसके बाद भी एटा मुख्यालय पर अभी तक कोई राजकीय महाविद्यालय नहीं बन सका। राजकीय महाविद्यालय न होने के कारण छात्र-छात्राओं को बहुत परेशानी होती है। इधर इसके कारण विद्यार्थियों को वह विषय भी नहीं मिल पाते जिन्हें बच्चे लेना चाहते हैं। इसके कारण कई बार बच्चों को कहीं बाहर जाकर पढ़ना पड़ता है। या फिर उन्हें ऐसे विषयों की पढ़ाई करनी पड़ती है जो विद्यालय में मौजूद होते हैं। आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान ने बोले एटा के तहत लोगों से संवाद किया तो शहर के बाशिंदों ने खुलकर अपनी बात कहीं। उनका कहना था कि जिला मुख्यालय पर राजकीय महाविद्यालय बनना चाहिए। मुख्यालय पर राजकीय महाविद्यालय की स्थापना की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। वर्षों से लंबित मांग को लेकर छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और सामा...