उरई, फरवरी 16 -- उरई। भले ही ऑटो और ई-रिक्शा चालक शहर की लाइफ लाइन कहे जाते हों पर उनकी लाइफ कतई आसान नहीं है। दिन रात कड़ी मेहनत के बदले ये इतना नहीं कमा पाते हैं कि आराम से घर परिवार चला सकें। दस-पांच रुपये के लिए लोगों की चिकचिक बात-बात पर गाली गलौज और देख लेने की धमकी से आए दिन ये चालक दो चार तो होते ही हैं साथ ही पुलिस का डंडा हमेशा इन पर तना रहता है। बावजूद इसके शहर में एक भी स्टैंड नहीं जहां पर ये अपने वाहन को खड़ा कर सकें। उरई में दिन रात शहरियों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने वाले ऑटो और ई-रिक्शा चालक तमाम समस्याओं से जूझ रहे हैं। इनकी कोई यूनियन भी नहीं है। इस वजह से ये अपनी समस्या को मजबूती से उठा भी नहीं सकते। इनकी सबसे बड़ी समस्या यह है कि इनके पास कोई स्टैंड नहीं है, जहां से यह सवारियां उठा सकें। चलते-फिरते इन्हें सवारियां उठा...
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