उरई, फरवरी 28 -- उरई। तड़के उजाला होने से पहले ही घर से निकल पड़ते हैं ताकि लोगों को समय पर दूध उपलब्ध करा सकें। बच्चे-बूढ़े हों या जवान, सबको सेहतमंद बनाने के लिए शुद्धता जरूरी है। किसी को साइकिल तो किसी को बाइक पर पीपे लाद कर पहुंचाना पड़ता है। सर्दी हो, गर्मी हो या फिर बारिश, हमें किसी भी हालत में समय पर काम करना है ताकि समय पर लोग चाय का स्वाद ले सकें। ठंड तो कभी गर्मी से पशु बीमार रहते हैं। क्षेत्र में पशुओं के डॉक्टर बड़ी मुश्किल से मिलते हैं। जिले में न तो दूध मंडी है और न ही सरकारी डेयरी, जिससे दूध खराब हो जाता हैं। ठिठुरन भरी सर्दी हो या फिर चिलचिलाती गर्मी, चाहे झमाझम पानी ही क्यों न गिर रहा हो। हर मौसम में हाड़तोड़ मेहनत संग सफर तय कर समय पर घर-घर हम दूध पहुंचाते हैं। तिथि-त्योहारों पर अधिक दूध बेचकर पिछला मुनाफा औसत में कर लेते हैं। ...
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