उरई, फरवरी 18 -- उरई। शादी हो या तिलक, छेदन हो या मुंडन, हर कार्यक्रम में चार चांद लगाते हैं बैंडबाजा वाले। दरवाजे पर बैंड न बजे तो कोई भी कार्यक्रम अधूरा सा लगता है। नाच-गाने के बीच इन्हीं की धुन पर मस्ती होती है पर आज बैंडबाजे की धुन मंद पड़ गई है। अब बैंडबाजे की जगह डीजे ने ले ली है। डीजे की डिमांड बढ़ने से बैंडबाजा वालों की रोजी-रोटी का संकट हो गया है। घर का खर्च भी जैसे-तैसे चल रहा है। इसके अलावा इन्हें न तो बेहतर इलाज मिल रहा है और न ही व्यवसाय करने के लिए रियायत पर ऋण। इनकी समस्या पर किसी का ध्यान नहीं है। मेरी प्यारी बहनियां बनेगी दुल्हनियां, सज के आएंगे दूल्हे राजा...भइया राजा बजाएगा बाजा...ये गीत और इसकी धुन हम सबने किसी न किसी शादी बारात में जरूर सुने होंगे। बैंडबाजे की धुन पर थिरके भी होंगे। पर अब इन बैंडबाजों की धुन धीर-धीरे मं...
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