उरई, मार्च 1 -- उरई। परिषदीय स्कूलों में हम बच्चों को पढ़ाने के लिए रखे गए हैं लेकिन काम दीगर भी लिए जा रहे हैं। जनगणना, बाल गणना, पशु गणना, बीएलओ पोलियो अभियान जैसे बहुत से ऐसे कार्य कराए जाते हैं जो बच्चों को शिक्षित करने से परे हैं। बावजूद इसके नौनिहालों को संस्कार संग शिक्षित कर शिक्षकों के साथ कदमताल कर हर काम बखूबी कर रहे हैं। फिर भी एक ही स्कूल में एक तरह के कार्य करने पर अलग-अलग सुविधाएं देकर सौतेला व्यवहार हो रहा है। स्कूलों में शुद्ध पानी तक नहीं हैं,तैनाती घरों से दूर होती है और मानदेय समय पर नहीं मिलता। बच्चों को नैतिकता-अनुशासन सिखाते हैं। उज्ज्वल भविष्य के सपने दिखा रहे हैं लेकिन खुद अंधेरे में जी रहे हैं। बुनियादी जरूरतों के लिए जूझ रहे हैं। सरकारी स्कूलों में बिजली, पानी और सड़क जैसी सुविधाओं के अभाव का खामियाजा भुगतना पड़ता ...
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