उरई, मार्च 24 -- उरई। गांवों को चमकाने वाले रोजगार सेवक मनरेगा की रीढ़ हैं, लेकिन समय पर मानदेय मिलने के लिए तरस रहे हैं। घर के जरूरी खर्च, बच्चों की पढ़ाई, दवा समेत अन्य खर्चों पर संकट है। कोई खेती तो कोई पशुपालन के सहारे परिवार को सहारा दे रहा है। अपने हक की ज्यादा बात करें तो प्रधान और अफसरों के गुस्से का शिकार बनते हैं। इन तमाम दुश्वारियों से जिले के रोजगार सेवक निजात चाहते हैं। आपके अपने अखबार 'हिन्दुस्तान से रोजगार सेवकों ने अपनी पीड़ा साझा की। सभी ने एकसुर में कहा कि तीज-त्योहार का रंग फीका न पड़े, इसलिए समय पर मानदेय दिया जाए और हर माह ईपीएफ का पैसा भी जमा कराया जाए। जालौन की 574 ग्राम पंचायतों में करीब 415 रोजगार सेवक तैनात हैं। इनको श्रमिकों को गांव में ही रोजगार मुहैया कराने की जिम्मेदारी दी गई है। ये लोग ग्राम पंचायतों में मनरेगा ...
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