आजमगढ़, मार्च 12 -- शुद्ध दूध बेचने के दावे के बावजूद डेयरी संचालक निराश हैं। उनका कहना है कि अब धंधा आसान नहीं रह गया है। उनके सामने तमाम चुनौतियां हैं। घूमंतु दूधियों से उन्हें सबसे अधिक दिक्कत है। उनकी मानें तो दूधिये कम दाम में मिलावटी दूध बेचते हैं। पशु अस्पतालों में दवाओं और डॉक्टरों की कमी भी उन्हें संकट में डालती है। वे चाहते हैं कि प्रशासन दूधियों का स्थान निर्धारित करे। ऐसा होने के बाद ग्राहक अच्छे-बुरे में फर्क कर सकेंगे। दाम कोई मसला नहीं रह जाएगा। रैदोपुर में 'हिन्दुस्तान के साथ बातचीत में डेयरी संचालकों ने कई समस्याएं साझा कीं। रामलखन मौर्य पिछले 50 साल से डेयरी चला रहे हैं। उनकी मानें तो मेहनत के मुताबिक कमाई नहीं है। वह गाय-भैंस का दूध क्रमश: 60 और 80 रुपये लीटर बेचते हैं। इसमें उन्हें घाटा होता है। 'घाटा...कैसे? वह बताते ...
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