आजमगढ़, फरवरी 23 -- हजारों वर्षों से भारतीय जीवन में रची-बसी आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के चिकित्सकों के लिए वर्तमान दौर कठिनाई वाला है। उनका कहना है कि आयुर्वेदिक अस्पतालों में उनकी आयोग से तैनाती होती है। लेकिन उन अस्पतालों में उन्हें भवन, शौचालय और स्टाफ की किल्लत से जूझना पड़ता है। कहीं उधार के भवन में अस्पताल चल रहा, कहीं भवन जर्जर हैं। कई जगहों पर एकमात्र डॉक्टर की तैनाती है। वे इलाज के साथ दवाओं की पुड़िया भी बांधते हैं। वार्ड ब्वाय और स्वीपर का काम भी उन्हें ही करना पड़ रहा है। एक नजर 60 राजकीय चिकित्सालय जनपद में किए जा रहे हैं संचालित। इन अस्पतालों में आयुर्वेदिक पद्धति से मरीजों का होता है इलाज। 17 अस्पतालों को आयुष्मान आरोग्य केंद्र बना दिया गया। यहां ओपीडी के अलावा योगा की क्लास भी प्रतिदिन होती है संचालित। 02 योग प्रशिक्षकों...
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