आगरा, मार्च 1 -- फतेहपुरसीकरी में हाथ से बनी दरियां जर्मनी, फ्रांस और यूरोप के अन्य देशों तक में घरों की शोभा रही हैं। लेकिन यहां बुनकर खुद खाली हाथ हैं। दशकों से दरी तो बुन रहे हैं लेकिन अपनी किस्मत का तानाबाना नहीं बुन सके। संसाधनों और आर्थिक तंगी से जूझते इन बुनकरों तक सरकारी योजनाओं की किरण अभी तक नहीं पहुंची है। फतेहपुरसीकरी की एक पहचान दरी उद्योग से भी है। आजादी से पहले शुरू हुआ यह दरी उद्योग सैकड़ों बुनकर परिवारों की आजीविका चला रहा है। यहां हाथ से बनी दरियां जर्मनी, फ्रांस और यूरोप के अन्य देशों तक में घरों की शोभा बढ़ा रही हैं। शुरुआत में यहां सूत से दरियां और फर्श बनते थे। अब कपड़े और हौजरी की कतरन से दरी तैयार होती है। पुश्तों से लोग इस व्यवसाय से जुड़े हैं। आगरा शहर से करीब 35 किमी दूर फतेहपुर सीकरी कस्बे के सीकरी दो हिस्सा, सौनोट...
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