अंबेडकर नगर, सितम्बर 24 -- सरकारी अस्पतालों में मरीजों के बेहतर इलाज व सभी प्रकार की जांच का लाभ सुचारु रूप मिलने के दावे बढ़ चढ़कर स्वास्थ्य विभाग द्वारा किया जाता है। यह अलग बात है कि हकीकत इससे कहीं परे है। जिला अस्पताल में ही थायराइड, एमआरआई व एंडोस्कोपिक जैसी जांच की सुविधा ही नहीं है। रेडियोलॉजिस्ट की कमीं के चलते अक्सर अल्ट्रासाउंड जांच प्रभावित होती है। आए दिन फिल्म समाप्त होने से डिजिटल एक्स रे का लाभ मरीजों को नहीं मिल पाता है। ऐसे में उन्हें मजबूर होकर मोटी रकम खर्च कर निजी सेंटर का सहारा लेना पड़ता है। जिला अस्पताल में वोल्टेज की बड़ी समस्या है, इसके चलते सीटी स्कैन जांच अक्सर प्रभावित होती है। कई कई दिनों तक शुगर किट नदारद होने से शुगर की जांच नहीं होती है। इससे इलाज से पहले मरीजों को निजी सेंटर पर जाकर शुगर की जांच करानी पड़ती है...
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