फरीदाबाद, फरवरी 10 -- फरीदाबाद। दिल्ली के दरियागंज क्षेत्र के प्रसिद्ध हस्तशिल्पी अब्दुल हसीब की बोन कार्विंग (हड्डी पर नक्काशी) क्राफ्ट इन दिनों अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले सहित विभिन्न मंचों पर पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। बेहद बारीक और धैर्यपूर्ण इस कला को अब्दुल हसीब का परिवार बीते करीब डेढ़ सौ वर्षों से संजोए हुए है। यह कला इनके परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है और वर्तमान में यह पांचवीं पीढ़ी तक पहुंच चुकी है। अब्दुल हसीब बताते हैं कि उनके पूर्वजों के समय में इस कला की शुरुआत हाथीदांत पर नक्काशी से हुई थी। उस दौर में हाथीदांत पर की गई मुगलकालीन नक्काशी राजघरानों और नवाबों में बेहद लोकप्रिय थी। हालांकि, वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत हाथीदांत पर प्रतिबंध लगने के बाद इस कला के अस्तित्व पर संकट आ गया। इसके बाद कारीगरों न...
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