लखनऊ, फरवरी 19 -- कुर्मांचल नगर स्थित उत्तराखंड महापरिषद भवन इन दिनों होली के उल्लास में डूब गया है। देवभूमि उत्तराखंड की भूमि से जुड़े लोग अपने मधुर स्वरों में बैठकी व खड़ी होली के गीतों के माध्यम से अपनी समृद्ध लोकसंस्कृति को जीवंत कर रहे हैं। गुरुवार को ढोलक, मंजीरा और हारमोनियम के साथ लोगों ने पारंपरिक होली गीतों को गाकर होली का स्वागत किया। उत्तराखंड महापरिषद के महासचिव भरत सिंह बिष्ट ने बताया कि कुमाऊं क्षेत्र में होली एक माह पहले से शुरू हो जाती है। उत्तराखंड की होली की विशेषता यह केवल रंगों का नहीं बल्कि संगीत और संस्कृति का पर्व होता है। बैठकी होली मंदिरों और घरों में बैठकर गाई जाती है। खड़ी होली खुले मैदान या आंगन में गोल घेरा बनाकर नृत्य करते हुए गाई जाती है। इसमें हास्य, व्यंग्य और सामाजिक गीत भी होते हैं।
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