पटना, जुलाई 9 -- बढ़ती हुई स्पर्धा और पढ़ाई में अच्छा करने और बेहतर नतीजे के दबाव में स्कूली बच्चों की सामाजिक और भावनात्मक सेहत खराब हो रही है। बच्चे तनाव और चिंता में रहते हैं। उन्हें लगता है कि उनपर स्कूल की पढ़ाई के अलावा अतिरिक्त बोझ दिया जा रहा है। ये बातें एनसीईआरटी की सर्वे रिपोर्ट में सामने आई है। एनसीईआरटी की ओर से बिहार के तीसरी, छठी और नौवीं कक्षा के बच्चों को परख सर्वे में शामिल किया गया था। इसमें तीनों कक्षा से 92 हजार 444 बच्चे शामिल किए गए। इनमें 27% (24959) बच्चों ने कहा कि तनाव में रहने की वजह से किसी से बात करने का उनका मन नहीं करता। 24% (22186) बच्चों ने कहा कि स्कूल की कक्षा से अतिरिक्त पढ़ाई के साथ ही एक्स्ट्रा एक्टविटी का बोझ होता है। 16% (14791) बच्चे स्कूल के कामों को लेकर हमेशा परेशान और चिंतित रहते हैं। 17% (157...
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