मुंगेर, फरवरी 3 -- जमालपुर, निज प्रतिनिधि। (इम्तेयाज आलम) इस्लामी साल का हर महीना किसी ने किसी खुसूसियत का हामिल है। हर महीना अपनी अहमियत के लेहाज से मुसलमानों के नजदीक एक खास जाजबियत रखता है। इसी कड़ी में अरबी साल का आठवां महीना शाबानुल मुअज्जम की बड़ी फजीलत है। इस महीने की 14वीं तारिख को सूर्यास्त के बाद 15वीं तारीख यानि मगलवार की शाम को बेशुमार रहमतों की रात शब-ए-बरात है। शब का अर्थ है रात और बरात का अर्थ बरी होना। यह बातें वलीपुर मस्जिद के कारी इमाम मो. फैयाज आलम रशिदी ने नमाज के दौरान तकरीर में कही। उन्होंने कहा कि यह वह महीना है कि जिसमें गुनाहों की माफी होती है। इस महीने में अल्लाह ने वादा किया है कि अगर कोई अपने गुनाहों से माफी मांगे और उस गुनाह को दुबारा न करने का वादा करे तो उसके गुनाहों को माफ कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह इस...