मुजफ्फरपुर, नवम्बर 30 -- मुजफ्फरपुर। पौराणिक कथाओं, त्योहारों और गांव के रीति-रिवाजों को रंगों और आकृतियों के जरिये जुबान देने वाली टिकुली कला आठ सौ साल पुरानी है। इस कला में रंग भरते कलाकार आज भी बेरंग हैं। 21वीं सदी में इस कला को नई पहचान दी है पद्मश्री अशोक कुमार बिस्वास ने, जिनके अथक परिश्रम से यह भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का दस्तावेज बन गयी है। इसके बावजूद आज भी जिले में टिकुली कला और इससे जुड़े टिकुली कलाकारों को वह मंच नहीं मिल पाया, जिसके वे हकदार हैं। इन्हें आय के अवसरों में कमी, आर्थिक असुरक्षा और सामग्री की उपलब्धता जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कई कलाकारों ने बेहतर आमदनी की आस में अन्य व्यवसाय अपना लिए हैं। यही वजह है कि टिकुली कला का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है। कलाकारों का कहना है कि सरकार हमारी समस्याओं के समाधान को ...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.