नई दिल्ली, फरवरी 5 -- नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। बीमा कंपनियों ने बीमा दावा करने और फिर उससे जुड़े कागजों को अपलोड करने की ऑनलाइन प्रक्रिया को जटिल बना रखा है। आम ग्राहक के लिहाज से देखा जाए तो बीमा राशि का दावा करना आसान नहीं है क्योंकि दावे के वक्त चिकित्सा से जुड़े कागजात के साथ ही आधार कार्ड, पैन कार्ड से लेकर कैंसिल चेक तक की कॉपी मांगी जाती है। जबकि पॉलिसी में ग्राहक द्वारा यह सारी जानकारी पहले से दी गई होती है। ऊपर से ऑनलाइन दावा पोर्टल पर कागजों के अपलोड करने का साइज भी निर्धारित है। ऐसे में कोई बार फाइल बड़ी होती है, जिसे छोटा कर अपलोड करना ग्राहक के लिए मुश्किल होती है। कागज पूरे लेकिन दिखाए जा रहे अधूरे शिवम यादव नाम के पॉलिसीधारक ने इरडा में क्लेम आईडी के साथ शिकायत दर्ज कराई कि उसके द्वारा कई बार कागज उपलब्ध कराए जा चुके हैं...
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