भभुआ, फरवरी 7 -- सरकारी सहायता के लिए लगानी पड़ती है दौड़, बमुश्किल मिल पाता है ऋण हरा चारा का प्रबंध नहीं होने और बाजार में सूखा चारा महंगा होने से दिक्कत (बोले भभुआ) भभुआ, नगर संवाददाता। महंगे चारे और बीमारियों के कारण बकरीपालक आर्थिक संकट झेल रहे हैं। उनका कहना है कि एक बकरी के बीमार होने पर अन्य कई बकरियों में बीमारी फैलनी शुरू हो जाती है, जिससे एक-एक कर बकरियों मरने लगती हैं। ऐसे में उन्हें आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ता है। साफ-सफाई, टीकाकरण और सही आहार प्रबंधन से इन समस्याओं को कम करने की कोशिश की जाती है, पर हमेशा सफलता नहीं मिल पाती है। पशुपालकों ने बताया कि बाजार में अरहर, चना, मटर का भूसा जैसे चारे के दाम बढ़ने से लागत बढ़ गई है। बरसीम घास भी महंगी हो गई है। खुली जगह पर हरा चारा चराने के लिए बकरियों को ले जाने पर किसी किसान के खेत...
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