आलोक कुमार मिश्रा, नवम्बर 5 -- आपातकाल के बाद के चुनाव में जेल का ताला टूटेगा, हमारा जॉर्ज जीतेगा का नारा बुलंद कर प्रतिरोध की आवाज बने मुजफ्फरपुर में इस बार न तो बड़े नारे हैं, न ही स्थानीय मुद्दों का शोर। बलिदानी जुब्बा सहनी की इस धरती पर पूरी लड़ाई विरासत, बगावत और जातियों की रहबरी के दावों और गुणा-भाग के इर्द-गिर्द ही लड़ी जा रही है। सियासत में पुरानी हनक खो देने और बड़े सपने टूटने का मलाल तो दिखता है, लेकिन चुनाव में सब इससे ही तय नहीं होगा।गायघाट बागमती और बूढ़ी गंडक से घिरे गायघाट पर इस बार सबकी नजर है। चुनाव से ऐन पहले एनडीए में खुलकर बगावत सामने आई थी। यहां सांसद वीणा देवी और एमएलसी दिनेश सिंह की बेटी कोमल सिंह जदयू से मैदान में हैं। सामने निवर्तमान विधायक राजद के निरंजन राय हैं। राजपूत और यादवों की बड़ी आबादी वाले गायघाट में जनसुराज क...
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