प्रयागराज, फरवरी 11 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि यदि आरोपी न्यायालय में उपस्थित होकर मुकदमे का सामना ही नहीं कर रहा है तो केवल शिकायतकर्ता की अनुपस्थिति के आधार पर सीआरपीसी की धारा 256 के तहत उसे बरी नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में बरी करना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। यह आदेश न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना ने चेक बाउंस के आरोपी राय अनूप प्रसाद की आठ याचिकाओं पर एकसाथ सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने याची पर 50 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है जो उसे शिकायतकर्ता को देने होंगे। मामला आगरा की अदालत में लंबित परिवाद (कम्प्लेंट केस) से जुड़ा था, जिसमें मजिस्ट्रेट ने 29 सितंबर 2014 को शिकायतकर्ता की अनुपस्थिति के आधार पर सीआरपीसी की धारा 256 के तहत आरोपी को बरी कर दिया था, जबकि रिकॉर्ड से स्पष्ट...
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