नई दिल्ली, फरवरी 6 -- आज के समय में अपमानजनक टिप्पणियां, ताने और नीचा दिखाने वाले शब्द आम हो गए हैं- चाहे वह कार्यस्थल हो, रिश्ते हों या सोशल मीडिया। अक्सर हम तुरंत प्रतिक्रिया देने के दबाव में आ जाते हैं और बाद में पछताते हैं। लेकिन एटिकेट कोच मानिक कौर के अनुसार, असली ताकत हर अपमान का जवाब देने में नहीं, बल्कि अपनी गरिमा और शांति को बचाए रखने में है। जब कोई आपको नीचा दिखाता है, तो लक्ष्य बहस जीतना नहीं होना चाहिए। असली उद्देश्य होता है अपनी सीमाएं तय करना, आत्मसम्मान बनाए रखना और उस व्यक्ति को यह स्पष्ट संकेत देना कि आप असम्मान के लिए उपलब्ध नहीं हैं।1. असर को सामने रखें अगर किसी की बात आपको चुभे, तो शांत तरीके से कहें- 'यह बात ठीक से नहीं आई।' इससे आप बिना आरोप लगाए यह बता देते हैं कि शब्दों का असर क्या हुआ। कई बार सामने वाला अपनी गलती...