भभुआ, जनवरी 8 -- मकर संक्रांति पर बहू-बेटियां बेसब्री से करती हैं खिचड़ी आने का इंतजार साड़ी सेट, शृंगार सामग्री, चूड़ा, ढूंढा, तिलवा, मीठा भेजने की रही है परंपरा (पेज चार की बॉटम खबर) भभुआ, कार्यालय संवाददाता। भाग-दौड़ की व्यस्त जिंदगी में रिश्तेदारी भी निभाने का लोगों के पास वक्त कम रह गया है। अगर बेटा नौकरी में है, तो वह पत्नी को साथ ले जाता है। बेटी है तो वह अपनी ससुराल में व्यस्त रहती है। घर में वृद्ध सास-ससुर की देखरेख कौन करेंगे, इसकी भी उन्हें फिक्र नहीं होती। हालांकि कुछ बेटे अपनी पत्नियों को उनकी सेवा में छोड़ चले जाते हैं और कुछ अपने माता-पिता के साथ रहते हैं। लेकिन, मां ही है जो अपने कर्तव्यों के प्रति फिक्रमंद दिखती हैं। तभी तो वर्षों से चली आ रही बहू-बेटियों के घर खिचड़ी पहुंचाने की परंपरा चली आ रही है। उनकी बहू-बेटी चाहे जहां कही...