संभल, मई 2 -- उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने गुरुवार को प्रदेश के सभी जनपदों और परियोजनाओं पर विशाल बाइक रैली निकाली गई। आंदोलन के अगले चरण के रूप में 02 मई से सात दिन तक राजधानी लखनऊ में शक्ति भवन पर क्रमिक अनशन किया जाएगा। संघर्ष समिति ने मांग की है कि निजीकरण के उद्देश्य से विद्युत वितरण निगमों से संविदा कर्मियों को हटाने का आदेश तुरंत वापस लिया जाए। समिति का कहना है कि यह कदम अमानवीय और अनुचित है, खासकर उन संविदा कर्मियों के लिए जो अपंग भी हो चुके हैं और बेहद कम वेतन पर काम कर रहे हैं। संघर्ष समिति ने उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है और कहा कि विद्युत क्षेत्र में निजीकरण का यह कदम 2018 और 2020 में हुए समझौतों का उल्लंघन है, जिनमें यह स्पष्ट था कि बिना बिजल...
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