गिरडीह, मार्च 10 -- धर्मेन्द्र पाठक, बगोदर। आज की महिला अब अबला नहीं रहीं। पुरुष प्रधान समाज में घर की चौखट को लांघने की जब महिलाओं को आजादी मिली तब पुरुषों से कंधा से कंधा मिलाकर चलते हुए कुछ महिलाओं ने समाज के लिए कुछ ऐसा कर दिखाया कि आज वह समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई है। ऐसी महिलाओं में शामिल है बगोदर के मंझलाडीह की भागीरथी देवी। समाजिक कुप्रथा बाल विवाह को रोकने के लिए वह आगे आई और उन्होंने अबतक 2 सौ से अधिक बच्चियों को बाल विवाह होने से बचाने का काम किया है। इतना ही नहीं हजारों स्कूली छात्र-छात्राओं को बाल विवाह के खिलाफ शपथ भी दिलाई है। बाल विवाह रोकने के पीछे की कहानी खुद उनसे जुड़ी हुई है। दरअसल भागीरथी देवी खुद बाल विवाह की शिकार हो गई थी। जब वह 13 साल की थी तब इनकी शादी हो गई। बाल विवाह होने से इनके सपने कमजोर पड़ गए थे। हा...
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