बाराबंकी, दिसम्बर 11 -- रामसनेहीघाट। श्री दुर्गा पूजा पांडाल में चल रही श्रीराम कथा के चतुर्थ दिवस कथा व्यास परम पूज्य श्री अतुल कृष्ण भारद्वाज जी महाराज ने बचपन के संस्कारों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बाल्यकाल के संस्कार ही व्यक्ति निर्माण की नींव होते हैं। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम के जन्म उपरांत कागमुशुंडी जी ने संकल्प लिया था कि प्रभु के पाँच वर्ष पूर्ण होने तक वे अवध में ही रहकर बाल लीलाओं के दर्शन करेंगे। इसी प्रसंग पर उन्होंने सूरदास जी का लोकप्रिय भजन 'खेलत खात फिरत अंगना' का सुंदर वर्णन किया। व्यास जी ने कहा कि कागमुशुंडी कोई साधारण कौआ नहीं थे, बल्कि भगवान भोलेनाथ भी उनसे श्रीराम कथा सुनने जाते थे। उन्होंने बाल लीला का उल्लेख करते हुए कहा कि धूल में खेलने वाले प्रभु को जब माता कौशिल्या राजा दशरथ की गोद में सौंपती ...
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