नई दिल्ली, फरवरी 13 -- सुप्रीम कोर्ट ने ठोस कचरा प्रबंधन के लिए लगातार कानूनी ढांचों में बदलाव के बावजूद, जमीनी स्तर पर कोई जरूरी परिणाम नहीं मिल मिलने पर गंभीर चिंता जताई। शीर्ष अदालत ने कहा कि बार-बार सिर्फ कानूनी ढांचों में बदलाव करने से जमीनी स्तर पर कमियां दूर नहीं होंगी और वांछित परिणाम भी नहीं मिलेंगे। जस्टिस पंकज मिथल और एस.वी.एन. भट्टी की पीठ ने भोपाल नगर निगम की ओर से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के फैसले के खिलाफ दाखिल अपील पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि पहले म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट (मैनेजमेंट और हैंडलिंग) रूल्स, 2000 को ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2016 से बदला गया और अब इनकी जगह ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026 ने ले ली है, जो 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने वाले हैं। जस्टिस मिथल ने कहा कि सिर्फ बार-बार कानूनी ढांचों में ...
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