लखनऊ, अक्टूबर 30 -- निमोनिया से गंभीर रूप से पीड़ित बच्चे को लेकर पिता बारिश के बीच जाम में फंसते फंसाते शहर के अस्पतालों में चक्कर लगाता रहा। पहले बच्चे को लेकर लोकबंधु अस्पताल गया। आरोप है कि वहां बच्चे को भर्ती नहीं किया गया। ट्रॉमा सेंटर के लिए रेफर कर दिया। जब वह ट्रॉमा पहुंचे तो पर्चा बनाने से इलाज शुरू होने में काफी समय लग गया। आखिरकार समय से सही इलाज न मिलने पर मासूम की सांसें थम गईं। पिता ने आरोप लगाया है कि डॉक्टरों की लापरवाही और देरी से इलाज शुरू होने की वजह से बेटे की जान गई। अमौसी निवासी शिवा के बेटे कान्हा (11) को निमोनिया था। शिवा ने बताया कि बेटे का इलाज स्थानीय निजी अस्पताल से करवा रहे थे, लेकिन लगातार उसका स्वास्थ्य बिगड़ रहा था। गुरुवार सुबह बेटे को सांस लेने में अधिक तकलीफ होने पर लोकबंधु अस्पताल पहुंचे। उनका आरोप है ...
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