मुजफ्फरपुर, फरवरी 4 -- मुजफ्फरपुर, वरीय संवाददाता। नगर निगम क्षेत्र में कचरा प्रबंधन को लेकर बायोमीथेनेशन प्लांट लगेगा। इसमें जैविक कचरे (गोबर, खाद्य अपशिष्ट, कृषि अवशेष आदि) से बायोगैस उत्पादन होगा। निगम को आमदनी भी होगी। कचरा प्रबंधन और ऊर्जा उत्पादन के साथ यह पर्यावरण के अनुकूल है। यह तकनीक चक्रीय अर्थव्यवस्था की बेहतरीन बानगी मानी जाती है, जिसमें कचरे को संपदा में बदला जाता है। राज्य के ताजा बजट में इसकी व्यवस्था की गई है। दरअसल, बायोमीथेनेशन तकनीक से जैविक कचरे को सूक्ष्मजीवों के माध्यम से हवा की अनुपस्थिति में सड़ाकर, मीथेन युक्त बायोगैस और उच्च गुणवत्ता वाली खाद में बदला जाता है। प्लांट में एयर-टाइट टैंक में जैविक पदार्थों को 30-35 दिनों तक सड़ाया जाता है। इससे मुख्य रूप से मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड से बनी बायोगैस बनती है। इसका उप...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.