वाराणसी, सितम्बर 8 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। बाबा लाटभैरव के विवाह की रस्म रविवार को दो हिस्सों में हुई। लक्ष्य था कि साढ़े छह घंटे में बारात से विदाई तक की रस्म पूरी कर ली जाए लेकिन अपार भक्त समूह की आस्था का आदर बनाए रखने के प्रयास में बारात को पहुंचने में ही छह घंटे लग गए। चंद्रग्रहण का सूतक लगने से पहले बाबा के रजत मुखौटे को विग्रह पर लगाया गया। विवाह का कर्मकांड चंद्रग्रहण के मोक्ष (रात 01:27 बजे) के बाद ब्रह्ममुहूर्त में पूर्ण हुए। इससे पहले रविवार को पौ फटने के साथ इन्ना माई की गली स्थित बसंत सिंह राठौर के निवास पर बारातियों की चहलकदमी शुरू हो गई। मुख्य अतिथि विधायक डॉ नीलकंठ तिवारी ने नारियल फोड़कर बारात रवाना की। गली से सड़क मार्ग तक मुखौटे को पारंपरिक रूप से कंधे पर लाकर भक्तों ने रथ पर विराजमान कराया। हाथी, घोड़े, ऊंट, शहनाई...
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