मधुबनी, अगस्त 17 -- मधुबनी, निज संवाददाता। कृषि प्रधान इस जिले में बाजार समिति नहीं रहने से की किसानों और व्यापारियों की परेशानियों को बढ़ा दिया है। यहां हजारों किसान धान, मक्का, गेहूं, सब्जी और दलहन-तिलहन की उपज तैयार करते हैं, लेकिन उचित मूल्य और सुविधाजनक बाजार न होने के कारण इन्हें मजबूरी में औने-पौने दाम पर बेचना पड़ता है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, जिले में करीब 6.5 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है। हर साल लगभग 18 लाख क्विंटल धान, 2.5 लाख क्विंटल टमाटर और 1.2 लाख क्विंटल आलू का उत्पादन होता है। लेकिन किसान औसतन 15 से 20 प्रतिशत घाटे में अपनी उपज बेचने को विवश हैं। इससे हर साल करीब 150 से 200 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान किसानों और व्यापारियों को झेलना पड़ता है। एक बार फिर से मधुबनी की हुई उपेक्षा नगर विधायक समीर कुमार महासेठ ने इस मुद्दे को...
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