बागेश्वर, अगस्त 5 -- उत्तराखंड के बागेश्वर में बिना रोक-टोक हो रहे खनन के कारण पहाड़ खिसकने,जल स्रोतों के सूखने और जमीन धंसने जैसी समस्याएं पैदा हो गई हैं। एक तकनीकी समिति ने 30 जुलाई को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) को एक चौंकाने वाली रिपोर्ट में बताया कि यहां के हालात ज्योतिर्मठ (पहले जोशीमठ) में हुए भूस्खलन से पहले की स्थिति जैसे हो गए हैं। सरकार द्वारा बनाई गई इस विशेषज्ञ समिति ने चेतावनी दी कि अगर तुरंत जरूरी कदम नहीं उठाए गए तो यह इलाका एक बड़े खतरे का सामना कर सकता है। इस समिति में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण,उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र,भूविज्ञान और खनन विभाग और भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान के विशेषज्ञ शामिल थे। समिति ने बागेश्वर,कांडा और डुगनाकूरी तहसीलों में 61 सोपस्टोन (खड़िया पत्थर) खदानों का सर्वे किया। सर्वे ...
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